सुनने में यहाँ तक आया है की वोह गुपचुप अनशन पर भी बैठा था..
अनशन खत्म होते ही एक हाथ में जूस और दूसरे में तिरंगा लिए इंडिया गेट जश्न मानाने पंहुचा
बेचारा भावुक मुस्सद्दी अपनी 1971 की फिएट गाडी को नो पार्किंग में लगा बैठा
दिल्ली पुलिस के जाबाज़ सिपाही भी पिछले कुछ दिनों से अनशन पर डटे थे
क्योंकि बिना रिश्वत के उनके दिन नहीं कटते थे ..
जैसे ही सिपाही ओमबीर ने आतंकवादी मुसद्दी को गाडी को नो पार्किंग में लगाते देखा
उसने दौड़ के उसको धर दबोचा और बोला. . ला भाई प्रदुषण cerfiticate और insurance पोलिसी दिखा
ओमबीर का पहला सवाल ही ये साबित करता था..
की उसके दिल्ली ट्रेफिक का अच्छा तजुर्बा था ..
मुस्सद्दी बेचारे ने गुहार लगायी..
"सिपाही जी आज तो छोड़ दो.. आज हमने जीती है आज़ादी की दूसरी लड़ाई.. "
ओमबीर भी बकरा फसते देख.. अकड कर बोला.. "क्यों छोड़ दूं.. क्या आज है तेरे फूफा की सगाई.. ??"
फिर भी मुस्सद्दी की हालत देख ओमबीर ने उसको साइड में आने की बात समझाई..
मुस्सद्दी ने भी अन्ना स्टाइल में सिपाही से अकड दिखाई..
और बोला.. "मरता मर जाऊँगा.. पर रिश्वत नही दूंगा भाई.. "
ओमबीर का गुस्से में माथा ठनका ..
और उसने ने मन ही मन सोचा.. "इसने तो मैं ऐसा सबक सिखाऊँगा .. औरो के लिए मिसाल बनूँगा...
बड़ी विनर्मता से उसने मुस्सदी को बताया..
"देख भाया .. तू और यो गाडी वातावरण प्रदूषित कर रहे है.. इसकी और तेरी दोनों की मरुम्मत की ज़र्रूरत है..
कल कागज़ ले आना और गाडी थाने से ले जाना.. "
मुस्सद्दी अच्छे नागरिक की तरह अगले दिन थाने आया..
वहां बैठे सिपाही पाण्डेय को उसने अपने आने का कारण बताया..
पाण्डेय भी मुआ पुराना पापी था..
बोला.. "भाई साहब.. आप गतल आ गए आपको NOC लेने हेड ऑफिस जाना था.. "
मुस्सद्दी भी अब कुछ कुछ समझने लगा था..
आखिरकार अन्ना का अनशन खत्म जो हो चुका था.
फिर भी उसने हार न मानी ..
अन्ना टोपी पहन सोचा आज दिलाउंगा याद सबको नानी..
हेड ऑफिस में उसका सामना खाऊ इंस्पेक्टर भाटिया से हुआ...
भाटिया ने उसको ऐसा लपेटा कि काम न आती कोई दुआ..
भाटिया ने तीन तीन दफाए लपेट मुस्सद्दी को लंबित किया..
बेचारा.. मुस्सद्दी भी सर पकड़ कर बोला.. हाय मैंने क्या किया ..?
भाटिया.. बोला "अबे सर पकड़ने से कुछ नहीं होगा..
15000 का जुरमाना तो देना ही होगा .. "
मुस्सद्दी ने धीरे से भाटिया को साइड में आ कर कुछ settlement कि रेकुएस्ट करी..
ये सुन भाटिया भड़क उठा.. बोला.. "ऐसे बात करने कि तेरी हिम्मत कैसे पड़ी.. "
"ठहर मैं तेरे पर १ दफा और लगता हूँ..
पुलिस इंस्पेक्टर को direct रिश्वत देने का सबक सिखाता हूँ.. "
इसी बीच सब इंस्पेक्टर पटेल ने एंट्री मारी.. और बोला..
"साब वैसे ये आदमी समझदार है.. पर पिछले 10-12 दिनों से कुछ बीमार है.. "
पटेल के समझाने से मुसद्दी को अपनी गलती समझ आई..
और 5000 हज़ार की गाडी उसने 10000 में थाने से छुडवाई
तो भाई.. लोगो.. मुस्सद्दी कि कहानी से हम सबको एक सबक तो लेना ही होगा..
गाँधी, अन्ना के देश में पैदा होने का टैक्स तो देना ही होगा..
आपका..
धीरज
good one...:) well written..its called black humor..hope the jan lok pal bill will be pased soon and it will remove all this corruption...just hope this happens
ReplyDeleteya so far its a hope only...
ReplyDeletewah monu bahut jhakas likha
ReplyDeleteab tum IT line chodo ur esi tarah apni rachnaye likh ke desh ka ujjwal future racho
prashant srivastava
bahut badhiya, lage raho :-)
ReplyDeletegud bhaiya..its a greatest joke and a cruel reality.............
ReplyDeletericha
good one .... :)
ReplyDeletesupbbb dhiraj....
ReplyDeletenice ...
ReplyDeleteSurinder Singh
Bahut badhia ..
ReplyDeleteअरे कौशिके बाबू क्या बात है
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