Sunday, October 4, 2009

बेटा बड़ा हो गया

स्कूल के ज़माने से अपने घर में सुना हमने एक ही नारा है
दुनिया का सबसे नाकारा बेटा हमारा है

बेटा बड़ा कब होगा यह चिंता हमारे पापा के सामने खड़ी है
हमने कहा पापा "चिल मारो" अभी पूरी ज़िन्दगी पड़ी है

किसी शुभचिंतक के समझाने पर उनको समझ आई
और हमने स्कूल खत्म होने तक की मोहलत पायी

कॉलेज के दिनों की भी अलग कहानी थी
दूसरों की गर्लफ्रेंड में नज़र आती हमको अपनी अर्धांग्नी थी

एक दो किस्से तो घर तक भी आये थे
और हमारे पिताजी ने फिर से पुराने सुर गाये थे

बेटा बड़ा कब होगा फिर वही चिंता हमारे पापा के सामने खड़ी है
हमने कहा पापा इस बार फिर "चिल मारो" अभी पूरी ज़िन्दगी पड़ी है

फिर से किसी शुभचिंतक ने आकर सेंध लगायी
इस बार हमारे नौकरी में लग जाने तक की गेंद घुमाई

भाई पहली नौकरी की कमाई भी हम क्या खूब लुटाते थे
आये दिन सिनेमा हाल में हाजरी लगा कर ही हम घर आते थे

अपनी हरकतों द्वारा हमने अपने वालिद को फिर से वहीँ खडा पाया था
बेटा बड़ा कब होगा ... फिर वही गीत उन्होंने गुनगुनाया था

इस बार शुभचिंतकों के सुझावों को पिताजी ने घर के बहार से ही निष्कासित किया
और हमारे शुभ विवाह का प्रस्ताव पारित किया

हमारी शादी का पहला साल भी बड़ा अजीब था
हफ्ते में दो फिल्म देखना शायद हमारी उनका नसीब था

निकाह में बाद हमारे में सिर्फ एक ही बदलाव था
हमारे खर्चों में हमारी बेगम का भी इज्ज़फा था

पिताजी को हमने फिर से उन्ही चिंताओं में खडा पाया था
बेटा बड़ा कब होगा... फिर से वही सालों पुराना सवाल गहराया था

शादी की दूसरी सालगिरह का तोहफा इस फिजूल खर्ची का उपचार था
क्योंकि हमारे साहेब जादे का दुनिया में आने का शुभ समाचार था

बाप बनने का एहसास ही अपने आप में ख़ास था
अब मैं अपनी हर ज़िम्मेदारी के काफी पास था

अगर समझो तो यह बात बहुत बड़ी है
आने वाली एक ज़िन्दगी अपने सपने लिए तुम्हारे सामने खड़ी है

यूं तो घर के हर शख्स का खुश होने का अलग ही अंदाज़ था
पर मेरे पापा की आखों में बेटे के बड़े होने का अलग ही अहसास था

आपका
धीरज