Friday, December 27, 2019

पापा और मैं..

बात तब की है जब मैं दस साल का था..
पापा मेरे सुपर हीरो और मै एकदम बेकार था..

10 साल बाद मैं 20 का हुआ
मुझे लगा मेरे को काफ़ी ज़्यादा और पापा को ज़्यादा कुछ नही पता

फिर और 10 साल निकले मैं 30 का हुआ..
अब तो लगता था जो कुछ हूँ मैं ही हूँ ..पापा से क्यों कुछ पूछूँ और क्यों कुछ कहूँ..

बात जब 40 पर टिकती हैं..
बावजूद सारी होशियारी के पापा की सलाह की ज़रूरत पड़ती है..

और जहां मैंने 50 को छुआ
ऐसा क्यों लगने लगा मुझे कुछ नही पापा को सब था पता..

आज जब 60 पर खड़ा हूँ
तो पता चला पापा मेरे सुपरहीरो और मैं एकदम बेकार हूँ..

धीरज
 

Monday, December 2, 2019

बस यूँ ही...

गर आज वो बच्चा छोटी से छोटी बात सुना पायेगा
तो कल वो बड़ी बात भी नही छुपायेगा...

ज़िंदगी के थपेड़े कभी न कभी वो भी झेलेगा..
पर आज तो वो बच्चा है .. तो ज़ाहिर है थोड़ा खेलेगा..

माना की मां बाप हो..प्यार करते हो तो इज़हार करो..
उसकी सुनो.. अपनी कम सुनाओ.. औऱ उसके साथ वक्त बिताओ..

उसको तो बड़ा होना है .. हो ही जाना है...
पर ये तय है ये बचपन फिर न आना है..

मासूम के मन में क्या है.. क्या कहना चाहता है..
कभी अपने से पूछो कि क्या वो कह पाता है..

बचपन हर बच्चे के लिए ज़रूरी होता है..
क्योंकि कइयों के लिये ज़िंदगी का सफर ही उनकी मंज़िल होता है..

धीरज..