अभी लॉक डाउन का दूसरा हफ़्ता ख़त्म होने को हुआ
और थप्पड़ मूवी का अमेज़न प्राइम पर आगमन हुआ..
वैसे तो भाइयों इस देश में कई क्रांतियां हुई है
पर इस मूवी के कॉन्सेप्ट ने अलग किस्म की कटाई की है..
जहाँ तक मुझे है याद पड़ता.
इसका तो ट्रेलर भी मैं बड़ी मुश्किल से एक बार ही देख पाया था..
अब पिक्चर की कहानी की क्या बात बताई जाए
इन पंक्तियों द्वारा थोड़ा मर्द जाती और ज़लील किया जाए...
वैसे तो मेरी बीवी मूवी के दौरान 1-2 किलो पॉपकॉर्न निपटा देती थी
पर इस बार तो 2 दाने के बाद ही ब्रेक लगी पड़ी थी...
रिमोट बीवी हाथ मे लिए बैठी थी
हर सीन के बाद रोक कर मेरी तरफ देखती थी...
2 घंटे की पिक्चर 4 घंटे की बना दी थी..
मेरे मुँह से तो एक बात न निकलती थी..
डायरेक्टर ने आखिर में एक काम पतियों लिए अच्छा किया
जो हीरोइन की बाप और भाई को भी लपेट लिया...
हालांकि पिक्चर में 3-4 अलग अलग कहानी चल रही थी
पर हर एक सीन में नज़र मुझे ही चुरानी पड़ रही थी..
अर्रे भाई हीरो जॉब तेरी.. मीटिंग तेरी... प्रिंटर तेरा..
बॉस तेरा.. प्रमोशन तेरा... बोलता बीवी को कॉफी बना लाओ ज़रा....
चाहे कोई कुछ भी कहे नए नए पतियों के लिए तो ये वरदान है
एग्जाम का पर्चा लीक है डिस्टिंक्शन के पूरे चांस है..
40 के आस पास वाले पतियों से एक ही अपील है..
पूरा ज़ोर लगा दो कम नंबर से पास होने की अभी भी उम्मीद है..
60 के ऊपर वालों की क्या बात की जाए..
डायरेक्टर ने सोचा इस पुराने चावल को इंटरवेल के बाद लपेटा जाए...
अब ये मासूम बुज़ुर्ग इस उम्र में क्या ज़ोर लगाए
दिल से माफी मांग लो .. हो सकता है कोई चमत्कार ही हो जाये..
ख़ैर इस कथा का समापन इसी बात पर बनता है
जो भी करो दिल से करो नही तो आखिर में ऑडिट तो सबका होता है...
आपका
धीरज