Sunday, November 14, 2021



अच्छे  ने अच्छा और बुरे ने बुरा जाना मुझे 
जिसकी जितनी जर्रूरत थी उसने उतना पहचाना मुझे 

जो पहुंच के पार है 
बस वहीँ पर बहार हैं 

कोशिश हमेशा उस पार की रहती 
पर कम्बख़्त तस्सली अपने पास ही कहीं रहती है 

हद  तो तब हो जाती है जब अपने 

Tuesday, June 15, 2021

राशन वाला शनिवार

महीने का वही वाला शनिवार था 
जब बीवी को किटी पार्टी और मुझे राशन लाना था 

वैसे तो शुक्रवार को ही बीवी ने अपनी पूरी ज़िम्मेदारी निभाई थी 
रोज़ देने वाली गालियों के साथ साथ राशन और सब्ज़ी की लिस्ट भी अच्छे से समझायी थी 

पर मैडम को ये कहाँ पता था 
की अपना दिमाग़ तो शनिवार शाम के दारु चखने में ही फसा था 

ख़ैर दोपहर को दोनों ने अपनी अपनी मंज़िल का जायज़ा लिया 
बीवी ने अपनी गाड़ी को किटी पार्टी और मैंने स्कूटी से सब्जी मंडी का रुख किया 

मंडी में घुसते ही आलू - प्याज की आवाज़ सुनाई दी 
मैंने कहाँ 5 -5 किलो दोनों दे दे भाई 

सब्ज़ी वाला कतई धूर्त निकला 
बोला भाईसाहब प्याज ज़्यादा खाने लगे हो ? भाभी से तो पक्का पूछ लिया 

मुझे लगा कह तो कम्बख्त  सही रहा है 
पर इसे कौन बताये पूछने में डर लग रहा  है

खैर हिम्मत जुटा कर फ़ोन किया 
फ़ोन उठाते थी बीवी ने बोला गर्मी काफी है सब्ज़ी को धो कर फ्रिज में तो रख दिया ?

मैंने सोचा इससे पहले पूरा वीकेंड ख़राब हो जाए 
कौन इससे पूछे चुप चाप जो समझ आये खरीद कर निकला जाए 

पर नियति को कुछ और ही मंज़ूर था 
उसने पूछ ही लिया क्या अभी तक सब्ज़ी में ही फसे हो.. ये बताओ फ़ोन क्यों किया था 

मैंने भी थोड़ा बात घुमाते हुए बोला . कुछ नहीं सोचा तुम्हारे हाल चाल पूछ लू
और क्या खरीदना है एक बार चेक कर लूँ 

दूसरी तरफ़ मानो सांप सूंघ गया . 
तपाक से पहला हमला मेरे दोस्तों और दारु की बोतल पर किया 

तुम एक काम करो कल की जो लिस्ट थी वो पड़ कर सुनाओ 
और मेहरबानी कर के मेरी किट्टी की वाट न लगाओ 

अब यहाँ काटो तो खून नहीं 
कौनसी लिस्ट कैसी सब्ज़ी कहाँ का राशन कुछ अता पता नहीं 

ख़ैर नेटवर्क का बहाना बना कर मैंने फ़ोन काट दिया 
जो जितना समझ आया जैसे तैसे निपटारा किया 

सोचा प्रोजेक्ट ख़त्म किया जाए 
आगे का रायता ऑडिट में देखा जाए 

तो भाई अपनी 100 cc की स्कूटी में  सामान लाद कर घर पहुंचा 
हमेशा की तरह बीवी ने एक एक सब्ज़ी और रेट का पूरा मुआयना किया 

पिछले सारे राशन वाले शनिवारों के साथ ये वाला शनिवार भी जुड़ गया 
मैंने भी चैन की सांस ली और सोचा ये काम भी निपट गया 

तो भैया पूरी कथा से हम एक बात अच्छे से समझ  गए है 
उपरवाले ने क्यों मुँह एक और कान दो दिए है .... 

धीरज  





Wednesday, August 12, 2020

कब बदलोगे

 हर प्रकार की पुरुष प्रजाति को समर्पित .

पहला साल ..
- मेरी साड़ी से मैचिंग की शर्ट नहीं पहन सकते थे क्या ..
- शादी हो चुकी है .. हालात बदल चुके है तुम कब बदलोगे
- और ये अपने दोस्त बदलो .. पता नहीं कहाँ से उठा कर लाये हो
2 - 5 साल
- मेरे घर जा कर थोड़ी बात कर लिया करो.. कब तक दामाद बने रहोगे .
- घर की ज़िम्मेदारी उठाना चालू करो.. कुछ पता है दूध , सब्ज़ी के बारे में..
- और ये अपने दोस्त बदलो .. पता नहीं कहाँ से उठा कर लाये हो ...
5 - 10 साल
- पिछली बार पिक्चर देखने कब गए थे कुछ याद है
- ये बच्चे दोनों के है कुछ पता है बड़ा वाला कौनसी क्लास में है
- और ये अपने दोस्त बदलो .. पता नहीं कहाँ से उठा कर लाये हो ..
10 - 20 साल (हर दिन एक जैसे ही लगेगा)
- कभी कुछ पूजा पाठ कर लिया करो
- 2 बर्तन धो कर एहसान मत दिखाया करो
- और ये अपने दोस्त बदलो .. पता नहीं कहाँ से उठा कर लाये हो ..
20 +
- ये चश्मा क्यों नहीं ठीक करवाते आज फिर पालक ठीक से साफ़ नहीं किया
- ये मटर पड़ी हुई नहीं दिख रही कब छीलोगे
- और ये अपने दोस्त बदलो .. पता नहीं कहाँ से उठा कर लाये हो ..

Tuesday, July 7, 2020

ग़ज़ल गायी नहीं कही जाती है ..

ऐसा कोई ज़रूरी नहीं है हर बात पर कोई बात कही जाती है
कुछ बातें सिर्फ सुनने के लिये ही कही जाती है

जाड़ो की धूप की सच में बात अलग होती है.
पर ऐसा नहीं है गर्मी की धूप  बेमानी होती है

लोग कहते है ज़िन्दगी तो जवानी में जी जाती है
पर हक़ीक़त में ये समझ बुढ़ापे में ही आती है

दौड़ते रहो भागते रहो तरक्की इसी से होती है
कभी दो पल चैन से बैठ के सोचो ये दौड़ पीछे क्या छोड़ देती है

पता नहीं चलता ज़रूरत कब हवस बन जाती है
और जब पता चलता है तो बस रेत की तरह हाथ से फिसल जाती है

ठीक जैसे ग़ज़ल गायी नहीं कही जाती है...
उसी तरह ज़िन्दगी दिखाई नही जी जाती है...

आपका
धीरज 


Saturday, May 9, 2020

थप्पड़

अभी लॉक डाउन का दूसरा हफ़्ता ख़त्म होने को हुआ
और थप्पड़ मूवी का अमेज़न प्राइम पर आगमन हुआ..

वैसे तो भाइयों इस देश में कई क्रांतियां हुई है
पर इस मूवी के कॉन्सेप्ट ने अलग किस्म की कटाई की है..

जहाँ तक मुझे है याद पड़ता.
इसका तो ट्रेलर भी मैं बड़ी मुश्किल से एक बार ही देख पाया था..

अब पिक्चर की कहानी की क्या बात बताई जाए
इन पंक्तियों द्वारा थोड़ा मर्द जाती और ज़लील किया जाए...

वैसे तो मेरी बीवी मूवी के दौरान 1-2 किलो पॉपकॉर्न निपटा देती थी
पर इस बार तो 2 दाने के बाद ही ब्रेक लगी पड़ी थी...

रिमोट बीवी हाथ मे लिए बैठी थी
हर सीन के बाद रोक कर मेरी तरफ देखती थी...

2 घंटे की पिक्चर 4 घंटे की बना दी थी..
मेरे मुँह से तो एक बात न निकलती थी..

डायरेक्टर ने आखिर में एक काम पतियों लिए अच्छा किया
जो हीरोइन की बाप और भाई को भी लपेट लिया...

हालांकि पिक्चर में 3-4 अलग अलग कहानी चल रही थी
पर हर एक सीन में नज़र मुझे ही चुरानी पड़ रही थी..

अर्रे भाई हीरो जॉब तेरी.. मीटिंग तेरी... प्रिंटर तेरा..
बॉस तेरा.. प्रमोशन तेरा... बोलता बीवी को कॉफी बना लाओ ज़रा....

चाहे कोई कुछ भी कहे नए नए पतियों के लिए तो ये वरदान है
एग्जाम का पर्चा लीक है डिस्टिंक्शन के पूरे चांस है..

40 के आस पास वाले पतियों से एक ही अपील है..
पूरा ज़ोर लगा दो कम नंबर से पास होने की अभी भी उम्मीद है..

60 के ऊपर वालों की क्या बात की जाए..
डायरेक्टर ने सोचा इस पुराने चावल को इंटरवेल के बाद लपेटा जाए...

अब ये मासूम बुज़ुर्ग इस उम्र में क्या ज़ोर लगाए
दिल से माफी मांग लो .. हो सकता है कोई चमत्कार ही हो जाये..

ख़ैर इस कथा का समापन इसी बात पर बनता है
जो भी करो दिल से करो नही तो आखिर में ऑडिट तो सबका होता है...

आपका
धीरज












Friday, December 27, 2019

पापा और मैं..

बात तब की है जब मैं दस साल का था..
पापा मेरे सुपर हीरो और मै एकदम बेकार था..

10 साल बाद मैं 20 का हुआ
मुझे लगा मेरे को काफ़ी ज़्यादा और पापा को ज़्यादा कुछ नही पता

फिर और 10 साल निकले मैं 30 का हुआ..
अब तो लगता था जो कुछ हूँ मैं ही हूँ ..पापा से क्यों कुछ पूछूँ और क्यों कुछ कहूँ..

बात जब 40 पर टिकती हैं..
बावजूद सारी होशियारी के पापा की सलाह की ज़रूरत पड़ती है..

और जहां मैंने 50 को छुआ
ऐसा क्यों लगने लगा मुझे कुछ नही पापा को सब था पता..

आज जब 60 पर खड़ा हूँ
तो पता चला पापा मेरे सुपरहीरो और मैं एकदम बेकार हूँ..

धीरज
 

Monday, December 2, 2019

बस यूँ ही...

गर आज वो बच्चा छोटी से छोटी बात सुना पायेगा
तो कल वो बड़ी बात भी नही छुपायेगा...

ज़िंदगी के थपेड़े कभी न कभी वो भी झेलेगा..
पर आज तो वो बच्चा है .. तो ज़ाहिर है थोड़ा खेलेगा..

माना की मां बाप हो..प्यार करते हो तो इज़हार करो..
उसकी सुनो.. अपनी कम सुनाओ.. औऱ उसके साथ वक्त बिताओ..

उसको तो बड़ा होना है .. हो ही जाना है...
पर ये तय है ये बचपन फिर न आना है..

मासूम के मन में क्या है.. क्या कहना चाहता है..
कभी अपने से पूछो कि क्या वो कह पाता है..

बचपन हर बच्चे के लिए ज़रूरी होता है..
क्योंकि कइयों के लिये ज़िंदगी का सफर ही उनकी मंज़िल होता है..

धीरज..