Friday, November 15, 2019

साले की शादी.. जीजा की ज़बानी..

बड़ी बड़ी बहनों के छोटे से प्यारे से भैया
आज बनने चले है किसी के सैय्या...

बड़ी बहनों का जब भी ज़िक्र होता है
तो साथ में एक जीजा भी मुफ़्त मिलता है...

ये धर्म, ऊंच नीच, जाती एक तरफ़ है..
और ये जीजा प्रजाति दूसरी तरफ़ है..

कहाँ इसरो ने छोड़ा अपना दूसरा चंद्रयान है
पर भारतीय जीजाओ का अपना अलग स्थान है

इन सालो (जीजाओ) का गज़ब अंदाज़ होता है
साले के शादी में आना मानो एक एहसान होता है..

अच्छा ये जीजा जितना पुराना होता जाता है
कमबख़्त उतना ही शाना हो जाता है..

बारात के डांस से इनके जलवे चालू होते है..
स्वागत में थ्री पीस सूट और बंद लिफ़ाफ़े तो चाहिए ही होते है...

ऐसी बात नही है ये अपनी ज़िम्मेदारी भी पूरी निभाते है
कैंटीन से सोमरस लाने की ज़िम्मेदारी भाईसाहब ख़ुद उठाते है..

वो जो बारात के पीछे धीरे धीरे गाड़ी चल रही होती है..
उसमें ड्राइवर से लेकर साकी की ज़िम्मेदारी किसी जीजा की ही देख रेख में हो रही होती हैं...

जहाँ दो तीन पेग अंदर चले जाते है..
तो क़सम से इतने सालों की खुंदक नागिन डांस से भी उतारते है..

अच्छा थोड़ी बात नए नए बने जीजा की करते है.. इस प्राणी का अलग तरह का रोना होता है
मानो बेचारा कॉलेज में आये फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट की तरह होता है..

अब ये बिका हुआ माल किसे क्या कहे और कहां रोने जाए
कब कौन सा फूफा, मौसा, चाचा इस ग़रीब की रैगिंग ले जाए...

हिन्दुतान में कोई शादी मुकम्मल नही होती है
जबतक उसमें किसी जीजा की नाराज़गी नही होती है..

ख़ैर सौ बातों को एक बात अपना साला भी बड़ा होने वाला है
आख़िरकार ये भी कल से किसी का जीजा बनने वाला है...

धीरज..

Saturday, November 9, 2019

बिटिया

कहते है जो ज़िंदगी बाप अपनी जवानी में न जी पाया होता है
वो अपने बेटे की जवानी में ढूंढता रहता है..

जो मज़ा बेटे के साथ खेलने में भागने में दौड़ने में आता है
वो एक बेटी के बस में कहां हो पाता है..

बेटे में क्या गज़ब ताक़त होती है 
अपने बूढ़े बाप को जवान कर देती है..

इसीलिये बेटी के लिए बाप के मन से बात निकलती है
बेटी कोई बेटे से कम थोड़े होती है...

बेटी भी सोचती होगी मैं बेटा कैसा हो सकती हूँ..
पर उसकी सोच की किसी को क्या खाक पड़ी है..

बेटा इसी सोच में रहता है कि मैं ऐसा क्या करूँ की बाप मुझे खुश कर पाए..
वहीं एक बेटी की ये उलझन खत्म नही होती की कैसे वो बाप को खुश कर पाए..

बेटे की बाप से आगे निकलने की चाहत खत्म नही होती है
वहीं एक बेटी हर घड़ी बाप के पीछे खड़ी दिखती है..

बेटे की बात अपनी फरमाइशों से शुरू होती है
वही एक बेटी "पापा आप कैसे हो " से बात शुरू करती है

बात एकदम सच है दोनो में फ़र्क तो बहुत होता है..
बेटा कभी एक बिटिया  नहीं बन सकता है...

धीरज...