आज बनने चले है किसी के सैय्या...
बड़ी बहनों का जब भी ज़िक्र होता है
तो साथ में एक जीजा भी मुफ़्त मिलता है...
ये धर्म, ऊंच नीच, जाती एक तरफ़ है..
और ये जीजा प्रजाति दूसरी तरफ़ है..
कहाँ इसरो ने छोड़ा अपना दूसरा चंद्रयान है
पर भारतीय जीजाओ का अपना अलग स्थान है
इन सालो (जीजाओ) का गज़ब अंदाज़ होता है
साले के शादी में आना मानो एक एहसान होता है..
अच्छा ये जीजा जितना पुराना होता जाता है
कमबख़्त उतना ही शाना हो जाता है..
बारात के डांस से इनके जलवे चालू होते है..
स्वागत में थ्री पीस सूट और बंद लिफ़ाफ़े तो चाहिए ही होते है...
ऐसी बात नही है ये अपनी ज़िम्मेदारी भी पूरी निभाते है
कैंटीन से सोमरस लाने की ज़िम्मेदारी भाईसाहब ख़ुद उठाते है..
वो जो बारात के पीछे धीरे धीरे गाड़ी चल रही होती है..
उसमें ड्राइवर से लेकर साकी की ज़िम्मेदारी किसी जीजा की ही देख रेख में हो रही होती हैं...
जहाँ दो तीन पेग अंदर चले जाते है..
तो क़सम से इतने सालों की खुंदक नागिन डांस से भी उतारते है..
अच्छा थोड़ी बात नए नए बने जीजा की करते है.. इस प्राणी का अलग तरह का रोना होता है
मानो बेचारा कॉलेज में आये फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट की तरह होता है..
अब ये बिका हुआ माल किसे क्या कहे और कहां रोने जाए
कब कौन सा फूफा, मौसा, चाचा इस ग़रीब की रैगिंग ले जाए...
हिन्दुतान में कोई शादी मुकम्मल नही होती है
जबतक उसमें किसी जीजा की नाराज़गी नही होती है..
ख़ैर सौ बातों को एक बात अपना साला भी बड़ा होने वाला है
आख़िरकार ये भी कल से किसी का जीजा बनने वाला है...
धीरज..