Wednesday, August 12, 2020

कब बदलोगे

 हर प्रकार की पुरुष प्रजाति को समर्पित .

पहला साल ..
- मेरी साड़ी से मैचिंग की शर्ट नहीं पहन सकते थे क्या ..
- शादी हो चुकी है .. हालात बदल चुके है तुम कब बदलोगे
- और ये अपने दोस्त बदलो .. पता नहीं कहाँ से उठा कर लाये हो
2 - 5 साल
- मेरे घर जा कर थोड़ी बात कर लिया करो.. कब तक दामाद बने रहोगे .
- घर की ज़िम्मेदारी उठाना चालू करो.. कुछ पता है दूध , सब्ज़ी के बारे में..
- और ये अपने दोस्त बदलो .. पता नहीं कहाँ से उठा कर लाये हो ...
5 - 10 साल
- पिछली बार पिक्चर देखने कब गए थे कुछ याद है
- ये बच्चे दोनों के है कुछ पता है बड़ा वाला कौनसी क्लास में है
- और ये अपने दोस्त बदलो .. पता नहीं कहाँ से उठा कर लाये हो ..
10 - 20 साल (हर दिन एक जैसे ही लगेगा)
- कभी कुछ पूजा पाठ कर लिया करो
- 2 बर्तन धो कर एहसान मत दिखाया करो
- और ये अपने दोस्त बदलो .. पता नहीं कहाँ से उठा कर लाये हो ..
20 +
- ये चश्मा क्यों नहीं ठीक करवाते आज फिर पालक ठीक से साफ़ नहीं किया
- ये मटर पड़ी हुई नहीं दिख रही कब छीलोगे
- और ये अपने दोस्त बदलो .. पता नहीं कहाँ से उठा कर लाये हो ..

Tuesday, July 7, 2020

ग़ज़ल गायी नहीं कही जाती है ..

ऐसा कोई ज़रूरी नहीं है हर बात पर कोई बात कही जाती है
कुछ बातें सिर्फ सुनने के लिये ही कही जाती है

जाड़ो की धूप की सच में बात अलग होती है.
पर ऐसा नहीं है गर्मी की धूप  बेमानी होती है

लोग कहते है ज़िन्दगी तो जवानी में जी जाती है
पर हक़ीक़त में ये समझ बुढ़ापे में ही आती है

दौड़ते रहो भागते रहो तरक्की इसी से होती है
कभी दो पल चैन से बैठ के सोचो ये दौड़ पीछे क्या छोड़ देती है

पता नहीं चलता ज़रूरत कब हवस बन जाती है
और जब पता चलता है तो बस रेत की तरह हाथ से फिसल जाती है

ठीक जैसे ग़ज़ल गायी नहीं कही जाती है...
उसी तरह ज़िन्दगी दिखाई नही जी जाती है...

आपका
धीरज 


Saturday, May 9, 2020

थप्पड़

अभी लॉक डाउन का दूसरा हफ़्ता ख़त्म होने को हुआ
और थप्पड़ मूवी का अमेज़न प्राइम पर आगमन हुआ..

वैसे तो भाइयों इस देश में कई क्रांतियां हुई है
पर इस मूवी के कॉन्सेप्ट ने अलग किस्म की कटाई की है..

जहाँ तक मुझे है याद पड़ता.
इसका तो ट्रेलर भी मैं बड़ी मुश्किल से एक बार ही देख पाया था..

अब पिक्चर की कहानी की क्या बात बताई जाए
इन पंक्तियों द्वारा थोड़ा मर्द जाती और ज़लील किया जाए...

वैसे तो मेरी बीवी मूवी के दौरान 1-2 किलो पॉपकॉर्न निपटा देती थी
पर इस बार तो 2 दाने के बाद ही ब्रेक लगी पड़ी थी...

रिमोट बीवी हाथ मे लिए बैठी थी
हर सीन के बाद रोक कर मेरी तरफ देखती थी...

2 घंटे की पिक्चर 4 घंटे की बना दी थी..
मेरे मुँह से तो एक बात न निकलती थी..

डायरेक्टर ने आखिर में एक काम पतियों लिए अच्छा किया
जो हीरोइन की बाप और भाई को भी लपेट लिया...

हालांकि पिक्चर में 3-4 अलग अलग कहानी चल रही थी
पर हर एक सीन में नज़र मुझे ही चुरानी पड़ रही थी..

अर्रे भाई हीरो जॉब तेरी.. मीटिंग तेरी... प्रिंटर तेरा..
बॉस तेरा.. प्रमोशन तेरा... बोलता बीवी को कॉफी बना लाओ ज़रा....

चाहे कोई कुछ भी कहे नए नए पतियों के लिए तो ये वरदान है
एग्जाम का पर्चा लीक है डिस्टिंक्शन के पूरे चांस है..

40 के आस पास वाले पतियों से एक ही अपील है..
पूरा ज़ोर लगा दो कम नंबर से पास होने की अभी भी उम्मीद है..

60 के ऊपर वालों की क्या बात की जाए..
डायरेक्टर ने सोचा इस पुराने चावल को इंटरवेल के बाद लपेटा जाए...

अब ये मासूम बुज़ुर्ग इस उम्र में क्या ज़ोर लगाए
दिल से माफी मांग लो .. हो सकता है कोई चमत्कार ही हो जाये..

ख़ैर इस कथा का समापन इसी बात पर बनता है
जो भी करो दिल से करो नही तो आखिर में ऑडिट तो सबका होता है...

आपका
धीरज