Tuesday, July 7, 2020

ग़ज़ल गायी नहीं कही जाती है ..

ऐसा कोई ज़रूरी नहीं है हर बात पर कोई बात कही जाती है
कुछ बातें सिर्फ सुनने के लिये ही कही जाती है

जाड़ो की धूप की सच में बात अलग होती है.
पर ऐसा नहीं है गर्मी की धूप  बेमानी होती है

लोग कहते है ज़िन्दगी तो जवानी में जी जाती है
पर हक़ीक़त में ये समझ बुढ़ापे में ही आती है

दौड़ते रहो भागते रहो तरक्की इसी से होती है
कभी दो पल चैन से बैठ के सोचो ये दौड़ पीछे क्या छोड़ देती है

पता नहीं चलता ज़रूरत कब हवस बन जाती है
और जब पता चलता है तो बस रेत की तरह हाथ से फिसल जाती है

ठीक जैसे ग़ज़ल गायी नहीं कही जाती है...
उसी तरह ज़िन्दगी दिखाई नही जी जाती है...

आपका
धीरज