"सुशील श्रीवास्तव"
5 Feb, 1958 - 26th Sep, 2018

अभी कल ही मैंने टीवी पर एक AD देखा था
धोनी भांजा और पंकज कपूर मामा बना था..
देखने सुनने में तो सिर्फ मास्टर कार्ड का विज्ञापन था
पर उस के किरदार में मैंने कहीं न कहीं अपने मामा को पाया था
बात कल ही की लगती है जब सब इकट्टे होते थे
मामा के साथ ही सब हसी मजाक होते थे...
मामा को मैं अक्सर फ़ोन किया करता था.. वो भी आये दिन करते थे
कुछ अपनी कहते और मेरी सुनते थे..
मामा हमारे काफी खुश मिजाज़ थे..
हर बात को रखने के हमेशा उनके अलग ही अंदाज़ थे
ज़िन्दगी ने उनको तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी
पर उन्होंने भी कहाँ हिम्मत छोड़ी थी..
वो हमेशा समय के बहुत पाबंद रहे
इत्तिफाक देखिये "आखरी समय" भी उतना ही पाबंद रहा..
वो काफी अच्छा लिखते भी थे..
अपनी ये श्रधांजलि उनके लिखे शेर पर ही खत्म करता हूँ..
"मौत पर्दा दाल देगी मेरे सब ऐबों पर..
लोगी की जुबां पर सिर्फ हुनर रह जायेंगे .. "
आपका
धीरज
5 Feb, 1958 - 26th Sep, 2018

अभी कल ही मैंने टीवी पर एक AD देखा था
धोनी भांजा और पंकज कपूर मामा बना था..
देखने सुनने में तो सिर्फ मास्टर कार्ड का विज्ञापन था
पर उस के किरदार में मैंने कहीं न कहीं अपने मामा को पाया था
बात कल ही की लगती है जब सब इकट्टे होते थे
मामा के साथ ही सब हसी मजाक होते थे...
मामा को मैं अक्सर फ़ोन किया करता था.. वो भी आये दिन करते थे
कुछ अपनी कहते और मेरी सुनते थे..
मामा हमारे काफी खुश मिजाज़ थे..
हर बात को रखने के हमेशा उनके अलग ही अंदाज़ थे
ज़िन्दगी ने उनको तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी
पर उन्होंने भी कहाँ हिम्मत छोड़ी थी..
वो हमेशा समय के बहुत पाबंद रहे
इत्तिफाक देखिये "आखरी समय" भी उतना ही पाबंद रहा..
वो काफी अच्छा लिखते भी थे..
अपनी ये श्रधांजलि उनके लिखे शेर पर ही खत्म करता हूँ..
"मौत पर्दा दाल देगी मेरे सब ऐबों पर..
लोगी की जुबां पर सिर्फ हुनर रह जायेंगे .. "
आपका
धीरज
Very nice
ReplyDeleteVery true....
ReplyDeleteबहुत खुब कहा धीरज ने, भाई बहुत खास था हमारा।
ReplyDeleteनटखट बचपन याद आता हमें है, मन की उलझनों पर चुटकलों पर्दा था भाई बहुत खास था हमारा
बहुत खुब कहा धीरज ने, भाई बहुत खास था हमारा।
ReplyDeleteनटखट बचपन याद आता हमें है, मन की उलझनों परचुटकलों पर्दा था भाई बहुत खास था हमारा।
(चित्रा)