Tuesday, June 15, 2021

राशन वाला शनिवार

महीने का वही वाला शनिवार था 
जब बीवी को किटी पार्टी और मुझे राशन लाना था 

वैसे तो शुक्रवार को ही बीवी ने अपनी पूरी ज़िम्मेदारी निभाई थी 
रोज़ देने वाली गालियों के साथ साथ राशन और सब्ज़ी की लिस्ट भी अच्छे से समझायी थी 

पर मैडम को ये कहाँ पता था 
की अपना दिमाग़ तो शनिवार शाम के दारु चखने में ही फसा था 

ख़ैर दोपहर को दोनों ने अपनी अपनी मंज़िल का जायज़ा लिया 
बीवी ने अपनी गाड़ी को किटी पार्टी और मैंने स्कूटी से सब्जी मंडी का रुख किया 

मंडी में घुसते ही आलू - प्याज की आवाज़ सुनाई दी 
मैंने कहाँ 5 -5 किलो दोनों दे दे भाई 

सब्ज़ी वाला कतई धूर्त निकला 
बोला भाईसाहब प्याज ज़्यादा खाने लगे हो ? भाभी से तो पक्का पूछ लिया 

मुझे लगा कह तो कम्बख्त  सही रहा है 
पर इसे कौन बताये पूछने में डर लग रहा  है

खैर हिम्मत जुटा कर फ़ोन किया 
फ़ोन उठाते थी बीवी ने बोला गर्मी काफी है सब्ज़ी को धो कर फ्रिज में तो रख दिया ?

मैंने सोचा इससे पहले पूरा वीकेंड ख़राब हो जाए 
कौन इससे पूछे चुप चाप जो समझ आये खरीद कर निकला जाए 

पर नियति को कुछ और ही मंज़ूर था 
उसने पूछ ही लिया क्या अभी तक सब्ज़ी में ही फसे हो.. ये बताओ फ़ोन क्यों किया था 

मैंने भी थोड़ा बात घुमाते हुए बोला . कुछ नहीं सोचा तुम्हारे हाल चाल पूछ लू
और क्या खरीदना है एक बार चेक कर लूँ 

दूसरी तरफ़ मानो सांप सूंघ गया . 
तपाक से पहला हमला मेरे दोस्तों और दारु की बोतल पर किया 

तुम एक काम करो कल की जो लिस्ट थी वो पड़ कर सुनाओ 
और मेहरबानी कर के मेरी किट्टी की वाट न लगाओ 

अब यहाँ काटो तो खून नहीं 
कौनसी लिस्ट कैसी सब्ज़ी कहाँ का राशन कुछ अता पता नहीं 

ख़ैर नेटवर्क का बहाना बना कर मैंने फ़ोन काट दिया 
जो जितना समझ आया जैसे तैसे निपटारा किया 

सोचा प्रोजेक्ट ख़त्म किया जाए 
आगे का रायता ऑडिट में देखा जाए 

तो भाई अपनी 100 cc की स्कूटी में  सामान लाद कर घर पहुंचा 
हमेशा की तरह बीवी ने एक एक सब्ज़ी और रेट का पूरा मुआयना किया 

पिछले सारे राशन वाले शनिवारों के साथ ये वाला शनिवार भी जुड़ गया 
मैंने भी चैन की सांस ली और सोचा ये काम भी निपट गया 

तो भैया पूरी कथा से हम एक बात अच्छे से समझ  गए है 
उपरवाले ने क्यों मुँह एक और कान दो दिए है .... 

धीरज