Saturday, November 9, 2019

बिटिया

कहते है जो ज़िंदगी बाप अपनी जवानी में न जी पाया होता है
वो अपने बेटे की जवानी में ढूंढता रहता है..

जो मज़ा बेटे के साथ खेलने में भागने में दौड़ने में आता है
वो एक बेटी के बस में कहां हो पाता है..

बेटे में क्या गज़ब ताक़त होती है 
अपने बूढ़े बाप को जवान कर देती है..

इसीलिये बेटी के लिए बाप के मन से बात निकलती है
बेटी कोई बेटे से कम थोड़े होती है...

बेटी भी सोचती होगी मैं बेटा कैसा हो सकती हूँ..
पर उसकी सोच की किसी को क्या खाक पड़ी है..

बेटा इसी सोच में रहता है कि मैं ऐसा क्या करूँ की बाप मुझे खुश कर पाए..
वहीं एक बेटी की ये उलझन खत्म नही होती की कैसे वो बाप को खुश कर पाए..

बेटे की बाप से आगे निकलने की चाहत खत्म नही होती है
वहीं एक बेटी हर घड़ी बाप के पीछे खड़ी दिखती है..

बेटे की बात अपनी फरमाइशों से शुरू होती है
वही एक बेटी "पापा आप कैसे हो " से बात शुरू करती है

बात एकदम सच है दोनो में फ़र्क तो बहुत होता है..
बेटा कभी एक बिटिया  नहीं बन सकता है...

धीरज...


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