Friday, October 10, 2008

दास्ताने बेंच

Onsite का सपना दिल में लिए हमने रखा bench पर कदम 
विदेश जाने के खवाब में उड़ रहे थे उन दिनों हम हर दम

पहले हफ्ते ही में एक प्रोजेक्ट के लिए propose हुए हम 
हमने भी सोचा लगता है धुल गए हैं अपने सारे गम

प्रोजेक्ट विलयात का था, तो हम भी थोड़े फिरंगी हो गए.
हमें क्या पता था की लोग हमारी इस अदा पर angry हो गए. 

एक महीने के बाद हमारी flight थी. 
और हमारे दिल में थी जली अरमानों की ट्यूब लाईट थी. 

internet के द्वारा हमने वहां के तापमान का note लिया
और एक आर्डर बेहद खूबसूरत overcoat का दिया.

Rs. के हिसाब से overcoat थोड़ा महंगा ज़रूर था.
पर हमें भी pounds में कमाने का गरूर था. 

तैयारी में हमारे हाथ पैर फूल चुके थे. 
जाने की डेट तो मानो हम भूल चुके थे.

तैयारी पूरे जोरों पर थी, और मौहोल कुछ ऐसा था 
शौपिंग शौपिंग ही थी और लापता वीसा था 

अब सिर्फ़ बाकी दस दिन थे
और हम भी पूरे चिंतित थे !! 

हमने सोचा पता करें की हमारी टिकेट का क्या status है.
पूछने पर पता चला की प्रोजेक्ट के रास्ते में थोड़े cactus है !

सुनते ही मानो धडकना भूल गया था हमारा दिल 
आखों के आगे नाचने लगे थे कभी वोह लम्बी शौपिंग और वोह महंगे overcoat के बिल. 

आख़िर वोह क़यामत का दिन भी आ ही गया 
और वोह रास्ते का cactus चुप चाप घात लगा गया

वैसे तो धोखा खाने की हमको पुरानी आदत है 
पर इस बार सही में पड़ी कस की लात है 

हम अपना दुःख तो फ़िर भी छुपा लेते 
पर हमारे रिश्तेदार और orkut पर बैठे उन दोस्तों का क्या करते 

सुना है आजकल मार्केट के बुरे हाल है 
हमको भी बस एक offshore प्रोजेक्ट की दरकार है. 

आपका
धीरज श्रीवास्तव

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